" भुखमरी " - 'श्री हरी ओम पवार' जी की अद्दभुत कविता. ये कविता कुछ साल पुरानी है, परन्तु इतनी कठोर और दर्द भरी है कि खुद कवि की आन्खो में आँसू आ गए थे.
हम में से बहुत से लोगो ने श्री हरी ओम पवार को पहले कभी नही सुना होगा. गलती हमारी नहीं है, अब पवार जी बालीबुड के सटार तो है नहीं इसलिए मिडीया इन्हे दिखाता नहीं. बालीबुड की चमक दमक में न जाने कितने कलाकार, कितनी प्रतिभाएं अन्धेरे में गुम हो चुकी हैं. कविता को एक बार जरूर सुने.