कहते हैं अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो तो हर काम आसान हो जाता है। ऐसी ही कहानी है ज्ञानेन्द्र पुरोहित की जिन्होंने समाज के ऐसे तबके को अपनी आवाज दी, जो न तो मुंह से बोल सकता है और न कानों से सुन सकता है।