अमेठी. जिस ईदगाह के आसपास देर शाम तक बच्चों का हुजूम होता था वहां आज गेटों पर ताले लटके हुए हैं। मोहल्लों और गालियों की सड़कों पर भी बच्चों की कतारे ईद पर देखने को मिलती थी अब उन्ही गलियों में इक्का दुक्का बच्चे चहलकदमी करते दिखे। बच्चों के चेहरों पर इन बातों की मायूसी देखने को भी मिली। लेकिन अब ये सब कोरोना महामारी के चलते इतिहास के पन्नो का हिस्सा बन गया। दरअस्ल बरसो से मुस्लिम समुदाय की परम्परा रही है के ईद के मौके पर सभी अपने-अपने बच्चे और बच्चियों को लेकर ईदगाह आकर नमाज अदा करते थे। उधर ईदगाह के बाहर सड़कों की दोनो पटरियों पर खिलौने, चाट, मिठाई आदि की कई दर्जन दुकाने होती थी। नमाज के बाद बच्चे पिता आदि के साथ इन दुकानो से खरीदारी कर खुशी-खुशी घर को जाते थे। लेकिन इस बार कोरोना महामारी ने बच्चों की खुशियां छीन ली। रंग बिरंगे और तरह-तरह के कपड़े पहनकर निकलने वाले बच्चों ने सादे और पुराने कपड़ो में ही ईद मनाया। यही नही जिला प्रशासन के निर्देश पर जिले भर में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने ईदगाह के बजाए घरों में ही नमाज अदा की। ऐसे में ना ईदगाह का गेट खुला ना यहां कोई मेला लगा। नतीजा ये हुआ कि ईद जैसे हर्षोल्लास के मौके पर बच्चे करते भी तो क्या करते। अधिकतर बच्चे अपने दोस्तो और बच्चियां अपनी सहेलियों के साथ खिलौने खेल कर ईद का पर्व मनाते नजर आए। हां बड़ो से ईदी (त्योहार पर खर्च करने के लिए कुछ पैसे) पाकर बच्चे चहक उठे। जिले के जायस कस्बे की अलीजा फातमा, कोरोना महामारी की वजह से ईद बहुत अच्छी नही मनाई। सहेलियों के साथ खिलौने खेले बड़ो ने ईदी दी।