मीरा बाई का भगवान कृष्ण से विवाह परमात्मा के साथ उनके आध्यात्मिक मिलन का प्रतीक है। वह अपनी कविताओं और गीतों में वह खुद को कृष्ण की दुल्हन बताती है और आध्यात्मिक स्तर पर उनके साथ मिलन की इच्छा रखती है।