भूतकाल में समजकर या नासमजी से दूसरों को दुःख पहुंचाया हो वह आज बार बार हमारे स्मरण में आते रहता है| इन गलतियों अथवा दुःख दिए जाने के लिए आज जो विचार आते है उनसे हम बाहर कैसे निकल सकते है?