जिस तरह कीपैड वाले फ़ोन, टाइपराइटर और फ़िल्म कैमरों जैसी टेक्नोलॉजी पुरानी हो चुकी है, उसी तरह शादी भी एक पुराना कॉन्सेप्ट है। बेरोज़गार गरीब भारतीय लड़कियों का खर्च उठाना बंद करें और उन्हें अपने परिवार के साथ रहने दें। अगर आपको लगता है कि यह बात हर जगह लागू नहीं होती, तो फ़ैमिली कोर्ट और SIFF की मीटिंग्स में जाकर देखें। शादी से जुड़े कानून जान-बूझकर एक जेंडर के ख़िलाफ़ बनाए गए हैं, ताकि एक जेंडर को बचाने का दिखावा करते हुए दूसरे से फ़ायदा उठाया जा सके। भारतीय औरतों को पैसे कमाने, कोई हुनर सीखने या अपना बिज़नेस शुरू करने के लिए बढ़ावा क्यों नहीं दिया जाता? तलाक़ के समय औरतों का सशक्तिकरण (Women's Empowerment) कहाँ गायब हो जाता है? अगर औरतें बच्चों को जन्म देने की ज़िम्मेदारी निभा सकती हैं, तो पैसे कमाना उनके लिए काफ़ी आसान होना चाहिए। भारतीय पुरुषों को पैसे के लिए परेशान करना बंद करें और गरीब भारतीय औरतों से शादी करना बंद करें।