प्रदीप ने इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ अलवर की पथरीली जमीन को हरा-भरा बनाया. पांच हजार पौधे, हर्बल नर्सरी और गोशाला बनाकर पेश की मिसाल.