अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में देवी-देवताओं के दादा कतरूसी नारायण आज भी शामिल नहीं होते हैं. जानिए दशकों पुरानी परंपरा के पीछे क्या है मान्यता?