जीवन में आने वाली परिस्थितियों में हम सभी कहीं न कहीं एडजस्टमेन्ट लेते ही हैं। परंतु बार-बार अगर हमें ही एडजस्टमेन्ट लेना पड़े, तब मन में ऐसा विचार ज़रूर आता है, "हर बार मैं ही क्यों एडजस्ट करूँ?" और परिणाम स्वरूप दूसरी बार जब एडजस्टमेन्ट लेना पड़े, तब मन दुःखी हो जाता है। ऐसे में हम भीतर ऐसी क्या सेटिंग करें कि हम दुःखी न होकर सभी परिस्थितियों में एडजस्टमेन्ट ले सकें?