बिजनौर के ग्राम नंदपुर में चार दिनों तक लगातार परिक्रमा करता एक कुत्ता लोगों की आस्था का केंद्र बन गया।
स्थानीय लोगों ने उसे ‘कुत्ता महाराज’ और ‘भैरव बाबा’ का रूप मानते हुए पूजा शुरू कर दी। भारी भीड़ जुट गई, लोग माथा टेकने लगे, चढ़ावा चढ़ाया जाने लगा और मेला-सा माहौल बन गया।
लेकिन क्या यह केवल आस्था थी — या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक, चिकित्सीय और पशु-मनोवैज्ञानिक कारण मौजूद था?
‘सही पकड़े हैं’ के तहत पत्रकार शिवेन्द्र गौड़ ने इस पूरे मामले की ग्राउंड लेवल पड़ताल की।
जांच में सामने आया कि दिल्ली-NCR के नोएडा स्थित Shivalay Animal Wellness Center के संस्थापक संजय मोहापात्रा, प्रशासन और स्थानीय डॉग लवर्स के सहयोग से रात के समय कुत्ते को सुरक्षित नोएडा लेकर आए।
मेडिकल जांच में पता चला कि कुत्ते का ब्लड प्रेशर बेहद कम, हार्ट बीट असामान्य रूप से धीमी थी और वह अत्यधिक थकावट की स्थिति में था। रास्ते में उसकी हालत और बिगड़ी।
यह रिपोर्ट आस्था बनाम विज्ञान की टकराहट नहीं, बल्कि
👉 पशुओं के स्वास्थ्य,
👉 उनके व्यवहार (Animal Behaviour)
👉 और अंधविश्वास से बचने की ज़रूरत
पर एक संतुलित और संवेदनशील संदेश देती है — बिना किसी की धार्मिक भावना को आहत किए।
👉 देखिए पूरी सच्चाई — आस्था या वैज्ञानिक सच?
रिपोर्ट: शिवेन्द्र गौड़,| सही पकड़े हैं
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