महोत्सव में सैकड़ों देवी-देवता अपनी पालकियों में मंडी पहुंचते हैं. ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की ध्वनि से पूरा वातावरण जीवंत हो उठता है.