मंदिर महंत कैलाश शर्मा ने गुरु-शिष्य परंपरा के तहत शंकराचार्य के चरण धोकर आशीर्वाद लिया और फिर चुनरी ओढ़ाकर सम्मानित करते हुए प्रसाद भेंट किया.