बुधवार 4 मार्च को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 69 पैसे की भारी गिरावट के साथ 92.18 के अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और कच्चे तेल की कीमतो में अचानक उछाल ने भारतीय मुद्रा बाजार में हड़कंप मचा दिया है. ईरान युद्ध की वजह से क्रूड ऑयल की कीमतें तेजी से बढ़कर 82 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई हैं....भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत आयात से पूरा करता है. इसलिए तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये की सेहत पर सीधा प्रभाव डाल रही हैं. विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया आज 92.05 पर खुला. और कुछ ही देर में फिसलकर 92.18 के स्तर पर आ गया. सोमवार को रुपया 91.49 पर बंद हुआ था. मंगलवार को होली की वजह से बाजार बंद थे. जिसके कारण दो दिनों का वैश्विक दबाव आज बाजार खुलते ही रुपये पर भारी पड़ा. रूपये पर दबाव की दूसरी बड़ी वजह, विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा भारतीय शेयर बाजार से की जा रही लगातार बिकवाली है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार को विदेशी निवेशकों ने 3,295.64 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. जब विदेशी निवेशक अपना पैसा निकालकर बाहर ले जाते हैं. तो वे डॉलर की मांग बढ़ाते हैं, जिससे रुपया कमजोर होता है. विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये के इस ऐतिहासिक स्तर तक गिरने से भारत का आयात बिल काफी बढ़ जाएगा. इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ सकता है. आयातित कच्चा तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं. जिससे माल ढुलाई महंगी होगी..मोबाइल, लैपटॉप और अन्य विदेशी कलपुर्जों के दाम बढ़ सकते हैं.