Hormuz Crisis के बीच Kashmir में पेट्रोल की छुट्टी? जानिए क्यों श्रीनगर की सड़कों पर 70 साल के बुजुर्ग को फिर से तांगा उतारना पड़ा। पश्चिम एशिया में युद्ध के मंडराते बादलों ने क्या भारत में ईंधन संकट की आहट दे दी है?
जैसे-जैसे पश्चिम एशिया (West Asia) पूरी तरह से युद्ध की कगार पर बना हुआ है और देश में पेट्रोलियम उत्पादों के स्टॉक को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं, जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर से एक बेहद दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके जमालट्टा के रहने वाले 70 वर्षीय गुलाम रसूल कुमार ने यात्रियों की सुविधा के लिए सदियों पुरानी 'तांगा सेवा' को फिर से जीवित कर दिया है।
गुलाम रसूल कुमार तब सिर्फ 10 साल के थे जब उन्होंने पहली बार तांगा चलाया था। उनके पास आज भी वह ऐतिहासिक लाइसेंस मौजूद है, जिसे 1980 के दशक में प्रशासन ने रिन्यू किया था। रसूल का मानना है कि ईरान और उसके सहयोगियों का अमेरिका-इजरायल के साथ बढ़ता तनाव वैश्विक ईंधन आपूर्ति को ठप कर सकता है। ऐसे में तांगा या घोड़ागाड़ी ही सबसे भरोसेमंद और सस्ता साधन है।
इस पहल ने श्रीनगर के स्थानीय लोगों के बीच पुरानी यादों (Nostalgia) को ताजा कर दिया है। गुलाम रसूल का कहना है कि तांगे को न तो महंगे पेट्रोल की जरूरत है और न ही इसके रखरखाव पर भारी खर्च आता है। साथ ही, यह पूरी तरह से प्रदूषण-मुक्त (Eco-friendly) है। कश्मीर की सड़कों पर फिर से दौड़ते ये तांगे आज के दौर में बढ़ती महंगाई और ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ एक मूक क्रांति की तरह देखे जा रहे हैं।
About the Story:
Amidst the escalating tensions in West Asia and concerns over global fuel supply chains due to the Iran-Israel conflict, 70-year-old Ghulam Rasool Kumar from Srinagar has revived the traditional Taanga service. Holding a license from the 1980s, he aims to provide a sustainable, pollution-free, and cost-effective alternative to petrol vehicles in Kashmir.
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