भारतीय रेल तकनीक को आकार देने में अहम भूमिका निभाने वाले इस कस्बे का रेलवे नेटवर्क से कटा रहना कितनी बड़ी विडंबना है? असम के बरपेटा के निवासियों के लिए ये सवाल दशकों से बना हुआ है. ये कस्बा कर्नल गुरु प्रसाद दास की जन्मभूमि है, जिन्होंने भारतीय रेलवे के शुरुआती सालों में इस्तेमाल होने वाली वैक्यूम ब्रेक प्रणाली विकसित की थी, लेकिन विडंबना ये है कि बरपेटा आज भी रेलवे मानचित्र से बाहर है. सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन 20 किलोमीटर से ज्यादा दूर है। लोगों की शिकायत है कि सीधी कनेक्टिविटी की कमी बरपेटा के विकास में गंभीर रुकावट है. नागरिक समूहों और छात्र संगठनों का कहना है कि उन्होंने इस मुद्दे को बार-बार उठाया है। सालों विरोध प्रदर्शन किया, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला.
निचले असम में ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी तट पर स्थित बरपेटा, सिर्फ जिला मुख्यालय नहीं, बल्कि एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र है। ये नव-वैष्णव परंपरा के ऐतिहासिक बरपेटा सत्रा का प्रमुख केंद्र है. खास कर दौल विधानसभा चुनावों से पहले, बरपेटा के निवासियों को उम्मीद बंधी है, कि भारतीय रेलवे के अग्रदूत की जन्मभूमि को जल्द ही देश के रेलवे मानचित्र पर जगह मिलेगी.