इंसाफ के मंदिर में जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो गरीब कहाँ जाए? इंदौर की यह घटना सिस्टम की क्रूरता का चेहरा है।
इंदौर के टैक्सी ड्राइवर अभिषेक पाटिल का कसूर सिर्फ इतना था कि उनकी गाड़ी का एक मामूली एक्सीडेंट हुआ। कार मालिक ने 25 हजार मांगे, लेकिन जब मामला थाने पहुँचा, तो इंसाफ की जगह 'उगाही' शुरू हो गई।
शर्मनाक आरोप: दरोगा ने टैक्सी छोड़ने के बदले ड्राइवर से 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगी।
टूटा हौसला: आर्थिक तंगी और पुलिसिया प्रताड़ना से परेशान अभिषेक ने हार मान ली और फांसी लगाकर जान दे दी।
दिखावे की कार्रवाई: मामला बढ़ने पर दरोगा को सस्पेंड कर दिया गया है।
लेकिन जाइरो न्यूज़ (Zyro News) पूछता है— क्या एक गरीब की जान की कीमत सिर्फ 'सस्पेंशन' है? क्या उस भ्रष्ट सिस्टम पर कोई सख्त कार्रवाई होगी जिसने एक परिवार का सहारा छीन लिया?
रिपोर्ट: शुभम त्रिपाठी, मैनेजिंग एडिटर (Zyro News 24 )
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