क्या पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ट्रंप प्रशासन के लिए खतरा हैं? जिस वक्त आसिम मुनीर ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता के सूत्रधार बने हुए हैं. वैसे वक्त में ये सवाल क्यों उठ रहा है? दरअसल अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने मुनीर को ट्रंप प्रशासन के लिए एक संभावित 'रेड फ्लैग' यानी खतरे का संकेत बताया है?
यहां सवाल उठता है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी को ऐसा क्यों लग रहा है कि मुनीर ट्रंप प्रशासन के लिए रेड फ्लैग हो सकते हैं. तो इसका जवाब है ईरानी नेतृत्व के साथ मुनीर के गहरे संबंध.
अमेरिकी खुफिया एजेंसी का कहना है कि ईरान के शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ उनके लंबे समय संबंध हैं. इनमें मारे गए कुद्स फोर्स के कमांडर कासिम सुलेमानी और आईआरजीसी कमांडर हुसैन सलामी भी शामिल थे.
भले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मुनीर को अपना 'पसंदीदा फील्ड मार्शल' बताया है.. लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच वाशिंगटन और तेहरान के बीच मध्यस्थ बने मुनीर की भूमिका की गहन जांच हो रही है. खुफिया अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि उनकी दोहरी भूमिका अमेरिकी हितों को खतरे में डाल सकती है.
फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसी के बिल रोगियो ने कहा कि ट्रंप को पाकिस्तानियों पर भरोसा नहीं करना चाहिए. अफगानिस्तान में पाकिस्तान एक धोखेबाज सहयोगी था. ऐसे में मुनीर के आईआरजीसी से संबंधों को ट्रंप प्रशासन के लिए एक बहुत बड़ा खतरे का संकेत माना जाना चाहिए.
पाकिस्तानी विश्लेषक रजा रूमी ने कहा कि मुनीर का उदय इस बात को दिखाता है कि 'पाकिस्तान में सेना, नागरिक नेतृत्व पर लगातार हावी होती जा रही है. बताया जा रहा है कि 2022 के आखिर में जब से मुनीर सेना प्रमुख बने हैं. तब से पाकिस्तान में राजनीतिक विरोधियों पर कार्रवाई तेज हो गई है. इसमें पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को किनारे किया जाना भी शामिल है.