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Kailash Mansarovar Yatra पर Nepal ने भारत में लगाया अड़ंगा! Lipulekh Route पर India-Nepal में ठनी

2026-05-05 14 Dailymotion

Kailash Mansarovar Yatra पर Nepal की कड़ी आपत्ति, क्या रुक जाएगी यात्रा? आस्था के इस सबसे बड़े सफर पर कूटनीतिक विवाद का साया गहरा गया है, जिससे हजारों श्रद्धालुओं की उम्मीदों पर संकट मंडरा रहा है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 को लेकर दक्षिण एशिया में एक नया कूटनीतिक तूफान खड़ा हो गया है। भारत और चीन द्वारा लिपुलेख दर्रे (Lipulekh Pass) के रास्ते यात्रा फिर से शुरू करने की योजना पर नेपाल (Nepal) ने कड़ा ऐतराज जताया है। काठमांडू स्थित विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर बयान जारी कर कहा है कि लिपुलेख क्षेत्र उसकी संप्रभुता का हिस्सा है और यहाँ किसी भी देश की गतिविधि उसकी अनुमति के बिना "अस्वीकार्य" है।
दरअसल, भारत सरकार ने हाल ही में घोषणा की थी कि जून से अगस्त 2026 के बीच करीब 1000 श्रद्धालु नाथू ला और लिपुलेख के रास्ते कैलाश दर्शन करेंगे। इसके लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। लेकिन नेपाल का दावा है कि 1816 की सुगौली संधि (Treaty of Sugauli) के आधार पर कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख उसके अभिन्न अंग हैं। यह विवाद 2020 में उस समय और गहरा गया था जब भारत ने धारचूला से लिपुलेख तक सड़क निर्माण किया था, जिसके जवाब में नेपाल ने अपना नया राजनीतिक नक्शा जारी किया था।
इस पूरे विवाद में चीन (China) की भूमिका भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत और चीन ने 2015 और फिर 2025 में इस रूट को व्यापार और तीर्थयात्रा के लिए सक्रिय करने पर सहमति जताई थी। नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली (K.P. Sharma Oli) और वर्तमान नेतृत्व इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की बात कह रहे हैं। इस वीडियो में हम विस्तार से समझेंगे कि लिपुलेख विवाद का इतिहास क्या है और क्या इस तनाव के बीच श्रद्धालु सुरक्षित रूप से अपनी यात्रा पूरी कर पाएंगे।

Nepal has officially lodged a protest against the joint plan of India and China to conduct the Kailash Mansarovar Yatra through the Lipulekh Pass in 2026. Citing the 1816 Treaty of Sugauli, Nepal claims the Lipulekh, Kalapani, and Limpiyadhura regions as its sovereign territory. This video analyzes the diplomatic fallout, the historical border dispute, and the impact on thousands of pilgrims scheduled to travel between June and August 2026.

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~HT.318~ED.106~PR.514~GR.122~