पचास साल से बसे परिवारों ने जताया मालिकाना हक़, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
सवाईमाधोपुर.सीमेंट फैक्ट्री कॉलोनी के मकानों को खाली कराने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ मजदूरों और उनके परिवारों का गुस्सा मंगलवार को सड़कों पर फूट पड़ा। कॉलोनीवासी जुलूस के रूप में मुख्य बाजार से होते हुए कलक्ट्रेट पहुंचे और जोरदार प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों ने प्रशासन को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए साफ कहा कि इन मकानों पर मालिकाना हक उन्हीं का है, क्योंकि वे पिछले पचास सालों से यहां रह रहे हैं, देखभाल कर रहे हैं और उनके पास सभी वैध पहचान पत्र व एड्रेस प्रूफ मौजूद हैं।
2007 में हुआ था अलॉटमेंट
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि राज्य सरकार ने वर्ष 2007 में ही इन मकानों का अलॉटमेंट कर दिया था। इसके बावजूद फैक्ट्री प्रबंधन ने मजदूर यूनियन के दलालों को साधकर सुप्रीम कोर्ट में गुमराह करने वाले तथ्य पेश किए और स्टे ले लिया। अब हालात यह हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने किसी को मालिक नहीं माना और मजदूर यूनियनें भी बर्खास्त हो चुकी हैं। कॉलोनीवासियों का कहना है कि यह जमीन राज्य सरकार की है और मकानों का मालिकाना हक उन्हीं को मिलना चाहिए।
मंत्री किरोड़ी लाल मीणा का मिला समर्थन
जुलूस के दौरान कैबिनेट मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने मोबाइल फोन पर लाउडस्पीकर से आंदोलनकारियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई मजदूरों के हक की है और वे पूरी तरह साथ हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की जा रही है और सभी प्रमाण मौजूद हैं। “ये मकान आपके थे और आपके ही रहेंगे,” उन्होंने आंदोलनकारियों को आश्वस्त किया। सीमेंट फैक्ट्री कॉलोनी का यह आंदोलन शहर के राजनीतिक इतिहास से भी जुड़ा है। मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत इसी फैक्ट्री के मजदूर आंदोलन से की थी। इस मौके पर शशांक सारस्वत, पल्लव परीक, प्रशांक, संजय, अनिल शर्मा, प्यारे लाल, मोनी भाई, संजय सिकरवार, गफूर खान सहित कॉलोनीवासी जुलूस में शामिल हुए। पूरे शहर में यह आंदोलन चर्चा का विषय बना रहा और लोगों ने इसे मजदूरों की हक की लड़ाई बताया।