इमरान खुर्शीद के लेख में दावा किया गया है कि पाकिस्तान अपनी आर्थिक बदहाली और लोकतांत्रिक संकट को छिपाने के लिए खुद को वैश्विक कूटनीति का अहम खिलाड़ी दिखाने की कोशिश कर रहा है. लेख के मुताबिक, सेना प्रमुख असीम मुनीर के नेतृत्व में पाकिस्तान में सैन्य पकड़ लगातार मजबूत हुई है और न्यायपालिका, मीडिया व राजनीतिक संस्थाओं पर सेना का प्रभाव बढ़ा है. बढ़ती महंगाई, ईंधन संकट और IMF पर निर्भरता के बीच आम जनता आर्थिक दबाव झेल रही है, जबकि सत्ता प्रतिष्ठान वैश्विक मध्यस्थता और विदेश नीति की छवि गढ़ने में जुटा है. लेख में यह भी कहा गया है कि संवैधानिक बदलावों के जरिए सत्ता का केंद्रीकरण बढ़ रहा है और विपक्ष, मीडिया तथा नागरिक स्वतंत्रताओं पर दबाव लगातार गहराता जा रहा है.