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swm news: लटिया नाले पर मंडराता खतरा : बरसात में आबादी क्षेत्र डूबने की आशंका

2026-05-30 532 Dailymotion

मौका रिपोर्ट ने खोला प्रशासन की नींद उड़ाने वाला सच

सवाईमाधोपुर. बरसात से पहले ही लटिया नाले की स्थिति ने शहरवासियों की चिंता बढ़ा दी है। राजबाग से गोपाल जी मंदिर तक निर्माणाधीन एलिवेटेड रोड ने नाले के प्राकृतिक बहाव को रोक दिया है और मौके पर जमा मलबे ने खतरे को कई गुना बढ़ा दिया है। न्यायालय से नियुक्त मौका कमिश्नर एडवोकेट राहुल सिंह शेखावत की ताज़ा रिपोर्ट ने साफ चेतावनी दी है कि यदि समय रहते मलबा नहीं हटाया और तकनीकी सुधार नहीं किए गए, तो मानसून में पानी विपरीत दिशा में बहकर घनी आबादी वाले क्षेत्रों में घुस जाएगा। यह स्थिति सवाईमाधोपुर के लिए बाढ़ जैसी त्रासदी का कारण बन सकती है। उधर, इस मुद्दे को पूर्व में बाढ़ के दौरान राजस्थान पत्रिका ने भी प्रमुखता से उठाया था।

नाले में मलबे से बनी अस्थाई सड़क
एलिवेटेड रोड के लिए बनाए जा रहे 104 पिल्लर्स की गहरी खुदाई से निकला भारी पत्थर और मिट्टी नाले में ही छोड़ दिया। इन्हीं मलबों से बीचों‑बीच एक चौड़ी अस्थाई सड़क बना दी है, जिस पर निर्माण कंपनी के भारी वाहन दौड़ रहे हैं। टूटी राजबाग पुलिया का मलबा भी नाले में जमा है, जिसे अब तक साफ नहीं किया। इस अस्थाई सड़क ने नाले के प्राकृतिक प्रवाह को पूरी तरह बाधित कर दिया है।

पिल्लर संख्या 87 से 78 पर मलबे की सड़क

मौका रिपोर्ट में यह हिस्सा सबसे खतरनाक बताया है। यहां नाले के धरातल से लगभग 5 फीट ऊंचाई पर 12 से 15 फीट चौड़ी मलबे की सड़क बना दी है। इस सड़क ने नाले को पूरी तरह पाट दिया है। रिपोर्ट में बताया है कि बरसात के समय पानी का दबाव इसी हिस्से पर सबसे अधिक पड़ेगा और यदि मलबा नहीं हटायातो पानी का बहाव सीधे आसपास की आबादी में घुस जाएगा।
आबादी और नाले का समान लेवल
रिपोर्ट में सबसे गंभीर तकनीकी खामी सामने आई है। पिल्लर संख्या 87 से 78 के बीच नाले का धरातल और मदीना मस्जिद सहित आसपास की आबादी का लेवल बराबर हो चुका है। पूर्व दिशा में कब्रिस्तान और श्मशान भी स्थित हैं। ऐसे में बरसात का पानी सीधे रिहायशी इलाकों में घुसने की आशंका है। पिल्लर संख्या 73 से 69 और 81 से 34 के बीच भी नाले और सड़कों का लेवल समानांतर पायाहै, जिससे खतरा और बढ़ गया है।

पिल्लर्स की कम ऊंचाई और ‘टी‑नुमा’ डिजाइन

निरीक्षण में पाया कि कई पिल्लर्स की ऊंचाई बेहद कम है। पिल्लर संख्या 103 की ऊंचाई केवल 3.6 फीट और पिल्लर संख्या 91 की महज 2.6 फीट। ऊपर बने ‘टी‑नुमा’ ढांचे की ऊंचाई करीब 10 फीट है। मौका रिपोर्ट ने आशंका जताई है कि बरसात का पानी इन ढांचों से टकराकर प्राकृतिक प्रवाह रोक देगा और बैक वाटर सीधे आबादी को अपनी चपेट में ले लेगा।
जंगल से आने वाले नाले बढ़ाएंगे मुसीबत
जंगल से निकलने वाले दो अन्य बड़े बरसाती नाले भी इसी क्षेत्र में आकर लटिया नाले में मिलते हैं। निर्माण से पूर्व नाले की गहराई नहीं की और न ही मलबा हटाया गया। ऐसे में जब तीन‑तीन नालों का पानी एक साथ इस पटे हुए क्षेत्र में पहुंचेगा, तो जल निकासी पूरी तरह बाधित हो जाएगी और बाढ़ का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा।

मौका कमिश्नर की यह है टिप्पणी

राजबाग पुलिया से भैरु दरवाजा तक लटिया नाले की स्थिति बेहद चिंताजनक है। जगह‑जगह लगे मलबे के ढेर और अस्थाई सड़क प्राकृतिक बहाव को रोक रही है। यदि समय रहते प्रशासन और निर्माण एजेंसी ने मलबा नहीं हटाया, तो आगामी मानसून में सवाईमाधोपुर के इस हिस्से में बाढ़ के हालात बनने से कोई नहीं रोक सकता। उधर, इस मामले में अगली पेशी 29 जून को होगी। स्थगन प्रार्थना पत्र पर सुनवाई होगी और यदि कार्रवाई नहीं की गई तो अवमानना याचिका दाखिल की जाएगी, ताकि आमजन को संभावित बाढ़ जैसी त्रासदी से राहत मिल सकें।
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इनका कहना है....

राजबाग से गोपाल जी के मंदिर तक निर्माणाधीन एलिवेटेड रोड के कारण लटिया नाले के प्राकृतिक बहाव क्षेत्र में गंभीर अवरोध पैदा हो गया है। न्यायालय अतिरिक्त सिविल जज (अतिरिक्त जिला सिविल न्यायालय) ने हयात अली बनाम राजस्थान राज्य के मामले में मौका स्थिति के लिए मौका कमिश्नर एडवोकेट राहुल सिंह शेखावत नियुक्त किया है। इनकी ओर से हालिया मौका रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार यदि आगामी बरसात से पहले नाले से मलबा नहीं हटाया और जरूरी तकनीकी सुधार नहीं किए तो बरसाती पानी विपरीत दिशा में बहकर शहर की घनी आबादी वाले क्षेत्रों में घुस जाएगा, जिससे भारी तबाही की आशंका है।
अब्दुल हासिब, अधिवक्ता, सवाईमाधोपुर