ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले के बाद से दुनिया का सबसे अहम समुद्री जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य बाधित है. इस रास्ते से वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 25 फीसदी और दुनिया की कुल तेल खपत का करीब 20 फीसदी हिस्सा गुजरता है. ईरान, इस अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग पर अपना नियंत्रण चाहता है, लेकिन अप्रैल में अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी से स्थिति को और जटिल बना दिया है. पश्चिम एशिया में जारी इस संकट का भारत पर भी असर पड़ा है. कई भारतीय जहाजों और भारतीय क्रू मेंबर्स वाले जहाजों पर हमले किए गए. कुछ जहाजों को रोक दिया गया.
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच मस्कट स्थित भारतीय दूतावास ने गुरुवार को कहा कि वो ओमान के शिनास बंदरगाह के पास एक पोत से जुड़ी घटना पर करीबी से नजर रख रहा है और चालक दल के सदस्यों को निकालने के प्रयास जारी हैं.
बुधवार को अमेरिकी सेना ने ओमान के पास पलाऊ के झंडे वाले तेल टैंकर एम/टी सेट्टेबेलो पर हमला किया, जिसमें तीन भारतीयों की मौत हो गई.
आठ जून को अमेरिकी नौसेना ने पलाऊ के झंडे वाले एक और टैंकर पर हमला किया था. इसमें भारतीय चालक दल के 24 सदस्य सवार थे. अमेरिकी नौसेना का कहना है कि जहाज ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी से बचने की कोशिश कर रहा था.
इस बीच, भारत ने संयुक्त राष्ट्र में व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की है. नई दिल्ली ने औपचारिक विरोध भी दर्ज कराया है. भारत ने संयम बरतने और आम नागरिकों की सुरक्षा की मांग की है.