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कश्मीर में संतूर बनाने की कला पर संकट, पद्मश्री गुलाम मोहम्मद ज़ाज़ बचा रहे 8 पीढ़ियों की विरासत

2026-06-20 4 Dailymotion

श्रीनगर के पुराने शहर में रहने वाले पद्मश्री सम्मानित कारीगर गुलाम मोहम्मद जाजको कश्मीर में संतूर बनाने की कला का आखिरी बड़ा उस्ताद माना जाता है. आठ पीढ़ियों से चली आ रही यह विरासत अब उनके कंधों पर टिकी है. 80 वर्षीय ज़ाज़ अपने हाथों से संतूर तैयार करते हैं, जिसे बनाने में वर्षों पुरानी लकड़ी, महीनों की मेहनत और बारीक कारीगरी लगती है. उनके संतूर को महान संगीतकार पंडित शिवकुमार शर्मा और भजन सोपोरी जैसे कलाकारों ने भी बजाया. 2022 में उन्हें पद्मश्री से नवाजा गया. निजी समय बनाए रखने और साझी रुचि के बीच ज़ाज इस पारंपरिक कला को जीवित रखने की आखिरी उम्मीद बनी हुई है.