देश के कई हिस्सों में लोग मानसून की बारिश का इंतजार कर रहे हैं, जबकि मौसम वैज्ञानिक अल नीनो की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. अल नीनो प्रशांत महासागर के तापमान में वृद्धि से जुड़ी जलवायु घटना है, जो भारत में मानसून को प्रभावित कर सकती है. मौसम विभाग के निर्देश मृत्युंजय महापात्र के जुलाई-अगस्त तक अल नीनो के मध्यम और सितंबर तक मजबूत रहने की संभावना है. हालाँकि, भारतीय ओशन डिपोल जैसे उपयुक्त कारक इसका प्रभाव कम कर सकते हैं. 4 से 18 जून के बीच देश में बारिश में 41 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है. कम बारिश से ओपेरा हाउस की अर्थव्यवस्था और किसानों की आय पर प्रभाव का खतरा बढ़ गया है.