रामदेवरा. फावड़े, तगारियां और जल संरक्षण का संकल्प...। रविवार सुबह रामदेवरा की नई नाड़ी पर ऐसा ही प्रेरक दृश्य देखने को मिला। राजस्थान पत्रिका के अमृतम् जलम् अभियान से जुड़कर ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और पंचायत कार्मिक बड़ी संख्या में श्रमदान के लिए पहुंचे। करीब दो घंटे तक लगातार चले श्रमदान में नाड़ी के पायतन से रेत निकालकर पाल पर डाली गई। सामूहिक प्रयास से जलस्रोत का स्वरूप निखरा और गांव में जल संरक्षण के प्रति नई जागरूकता का संदेश पहुंचा। नई नाड़ी कभी आसपास की ढाणियों के लिए पेयजल का प्रमुख स्रोत रही है। वर्षों तक नियमित संरक्षण नहीं होने से पायतन में बड़ी मात्रा में रेत जमा हो गई, जिससे इसकी जलधारण क्षमता लगातार कम होती चली गई। अब ग्राम पंचायत के प्रयासों और जनसहयोग से इस पारंपरिक जलस्रोत को पुनर्जीवित करने की पहल तेज हो गई है।