देव स्नान पूर्णिमा के शुभ अवसर पर लाखों भक्त पवित्र त्रिदेव - भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की भव्य स्नान यात्रा देखने के लिए तीर्थ नगरी पुरी में इकट्ठा हुए. इसे दुनिया भर में मशहूर रथ यात्रा (रथ उत्सव) से पहले की सबसे महत्वपूर्ण रस्मों में से एक माना जाता है. हिंदू महीने ज्येष्ठ की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पवित्र त्योहार साल का पहला मौका होता है जब भक्त रथ यात्रा से पहले गर्भगृह के बाहर भाई-बहन देवताओं की एक झलक पाते हैं. रस्मों के तहत, भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और सुदर्शन को वैदिक मंत्रों के जाप, शंख बजाने और झांझ बजाने के बीच पारंपरिक 'पहंडी' जुलूस में गर्भगृह से स्नान मंडप तक ले जाया गया. पूजा की जगह पर रखने के बाद देवताओं को मंदिर के 'सुनकुआ' (सोने का कुआं) से निकाले गए 108 घड़ों पवित्र पानी से नहलाया गया. सदियों पुरानी रस्म के तहत पानी में चंदन का लेप, कपूर और दूसरी खुशबूदार चीज़ें मिलाई जाती है.