गुजरात के अहमदाबाद में विमान हादसा हुए एक साल से ज्यादा का वक्त बीत चुका है लेकिन अहमदाबाद के मेघानीनगर में समय जैसे 12 जून 2025 पर ही ठहर गया है. यहां कुछ लोग आज भी हर उड़ते विमान के साथ उस दिन याद कर सिहर उठते हैं. कुछ घरों में अब भी एक कुर्सी खाली रखी जाती है. कुछ मांएं आज भी अपने बच्चों का इंतजार करती हैं और कुछ जख्म ऐसे हैं जो शरीर पर नहीं, रूह पर लगे हैं.
उस दिन कई परिवारों ने किसी ना किसी अपने को खोया था. किसी ने बेटा खोया, किसी ने बेटी... किसी ने मां तो किसी ने जीवनसाथी. इस हादसे में सिर्फ जिंदगियां ही नहीं बिखरी थीं, बल्कि पहचान भी बिखर गई थी. हालात इतने भयावह थे कि शवों की पहचान तुरंत संभव नहीं थी और यहीं से शुरू हुई फोरेंसिक टीमों की सबसे कठिन लड़ाई. हादसे के निशान आज भी मिटे नहीं हैं. ये जली हुई गाड़ियां, ये काली दीवारें और ये खामोशी, आज भी उस दिन की गवाही देती हैं. ग्राउंड जीरो से ईटीवी भारत के न्यूज एडिटर बिलाल भट्ट की EXCLUSIVE रिपोर्ट