मध्य प्रदेश के मंदसौर में एक शांत आर्थिक और पर्यावरणीय परिवर्तन हो रहा है. जिले में अलसी का भूसा पहले फेंक दिया जाता था, अब लिनेन फाइबर में संसाधित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय किसानों के लिए आय का एक नया स्रोत बन गया है. इस परिवर्तन के केंद्र में स्व-शिक्षित इंजीनियर नहारू खा हैं, जिन्होंने जिला प्रशासन की मदद से एक बेलर मशीन बनाई है. यह मशीन अल्सी के भूसे को निकालती है, जिसे फिर लिनेन कपड़ा बनाने के लिए वस्त्र निर्माताओं को आपूर्ति किया जाता है. कभी खेती के कचरे के तौर पर देखे जाने वाले इस उत्पाद को इस पहल ने अलसी की खेती के रूप में एक नई पहचान दी है, जिससे मंदसौर टिकाऊ खेती के लिए एक मॉडल जिले के तौर पर उभरा है.