सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका पद्म विभूषण तीजन बाई ने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया है. छत्तीसगढ़ की लोक कला को वैश्विक पहचान दिलाने वाली तीजन बाई ने 5 जुलाई सुबह लगभग सवा तीन बजे रायपुर एम्स में अंतिम सांस ली. उनकी आवाज, अभिनय और अनोखी प्रस्तुति शैली से पंडवानी को देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक में पहचान मिली है. तीजन बाई छत्तीसगढ़ की पहली और भारत की उन गिने-चुने कलाकारों में से हैं जिन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण तीनों सम्मान से नवाजा गया है. तीजन भारत के तीनों पद्म पुरुस्कारों के अलावा विदेश में भी तीजन बाई सम्मानित हो चुकी हैं. ऐसी तीजन बाई का योगदान ना सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे कला जगत में अतुलनीय और अविस्मरणीय रहेगा. उनका निधन देश की सांस्कृतिक विरासत के लिए एक अपूरणीय क्षति है. आज भले ही तीजन बाई पंचतत्व में विलीन हो गई हों, लेकिन उनकी आवाज, उनकी पंडवानी और उनकी सांस्कृतिक विरासत सदैव अमर रहेगी.