पुराने नुस्खों से आगे बढ़े किसान, आधुनिक बीजों ने दी नई पहचान
सवाईमाधोपुर. खेती किसानी का परंपरागत दौर अब तेजी से बदल रहा है। कभी किसान अपनी ही फसल से बीज बचाकर सालभर सुरक्षित रखते थे और उसी से अगली बुवाई करते थे। लेकिन बदलते मौसम, लगातार असफल होती फसलें और बेहतर पैदावार की चाह ने किसानों की सोच और तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है। अब किसान घरेलू बीजों की जगह वैज्ञानिक निगरानी में तैयार प्रमाणित बीजों पर भरोसा जताने लगे हैं। यही वजह है कि जिले में खेती का स्वरूप बदल रहा है और किसान आधुनिक तकनीक के साथ सुरक्षित बीजों को अपनाकर उत्पादन बढ़ाने की राह पर हैं।
परंपरागत बीज बचाने की पुरानी कहानी
कुछ दशक पहले खेती पूरी तरह आत्मनिर्भर हुआ करती थी। किसान अपनी फसल के सबसे स्वस्थ पौधों को चुनकर उनके दाने अलग करते थे। फिर इन बीजों को सालभर सुरक्षित रखने के लिए घरेलू नुस्खों का सहारा लिया जाता था। मिट्टी के बर्तनों में बीज रखकर नीम की पत्तियों, राख या गोबर से लीपकर उन्हें नमी और कीड़ों से बचाया जाता था। यह तरीका पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहा और किसानों की खेती इसी पर निर्भर रहती थी।
प्रमाणित बीजों की वैज्ञानिक गारंटी
अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। कृषि वैज्ञानिकों और राज्य बीज निगमों की निगरानी में तैयार किए गए प्रमाणित बीजों के पैकेट पर प्रमाणीकरण संस्था का टैग होता है, जो उनकी आनुवंशिक और भौतिक शुद्धता की गारंटी देता है। ये बीज उन्नत अनुसंधान से तैयार होते हैं, जिससे फसल में कीट और रोग लगने का खतरा कम होता है। किसान मानते हैं कि प्रमाणित बीजों से पैदावार अधिक होती है और जोखिम घटता है।
खरीफ सीजन की नई तैयारी
मानसून की दस्तक के साथ ही किसान खेतों की ओर लौट आए हैं। मूंग, मक्का, बाजरा, ज्वार, दलहन, तिलहन और नकदी फसलों की बुवाई की तैयारी में जुटे किसान अब प्रमाणित बीजों को प्राथमिकता दे रहे हैं। उनका कहना है कि सुरक्षित बीजों से फसल की सफलता की संभावना बढ़ जाती है और मेहनत का बेहतर परिणाम मिलता है।
जमाने के साथ आया बदलाव
सुनारी गांव निवासी रामकरण गुर्जर, जयराम सिंह और लटूर सिंह गुर्जर बताते हैं कि पहले घरेलू बीज ही काम में आते थे, लेकिन अब जमाने के साथ बदलाव आया है। बाजार में मिलने वाले प्रमाणित बीजों को किसान अपनाने लगे हैं। उनका मानना है कि यह बदलाव खेती को टिकाऊ और लाभकारी बनाने की दिशा में अहम कदम है।
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इनका कहना है...
पैदावार की चाह ने किसानों की सोच और तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है। अब किसान घरेलू बीजों की जगह वैज्ञानिक निगरानी में तैयार प्रमाणित बीजों पर भरोसा जताने लगे हैं। इससे पैदावार व आय में बढ़ोतरी हो रही है।
लखपत मीणा, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग सवाईमाधोपुर