पहले शिवानंद तिवारी और अब मृत्युंजय तिवारी, आखिर लालू यादव और तेजस्वी यादव की पार्टी में ब्राह्मण चेहरे सहज क्यों नहीं? अविनाश कुमार की रिपोर्ट..