शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर आते ही जंतर-मंतर पर जश्न शुरू हो गया. छात्रों ने छात्र एकता जिंदाबाद के नारे लगाए. राष्ट्रगान गाया. इस दौरान नीट पेपर लीक के बाद जान गंवाने स्टूडेंट्स के लिए 2 मिनट का मौन रखा गया. इधर, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे करोड़ों युवाओं की जीत और PM मोदी की जिद की हार है.
वहीं, रेजिग्नेशन की मांग को लेकर अंशन पर बैठने वाले समाजसेवी सोनम वांगचुक ने कहा कि सीधा लोकतंत्र, जो सड़कों से निकला है. यह शांति, धैर्य और दृढ़ता की जीत है. CJP और देश की 'जेन-Z) को बधाई और उन सभी नागरिकों का धन्यवाद जिन्होंने डर और डर के डर को त्यागकर देश के हर कोने से आवाज उठाई. वहीं राहुल गांधी ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हमारी शिक्षा प्रणाली को नया रूप देने की दिशा में एक बड़ा कदम है.
2014 में पहली बार मोदी सरकार बनने के बाद 12 साल के कार्यकाल में धर्मेंद्र प्रधान पहले मंत्री हैं, जिन्हें विरोध के चलते इस्तीफा देना पड़ा है। हालांकि, इससे पहले 2018 में विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने इस्तीफा दिया था, लेकिन तब दुनियाभर में 'मी टू' आंदोलन चल रहा था और अकबर पर पत्रकारिता के दिनों में यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे.