श्रम विभाग ने 451 निर्माण स्थलों को थमाए नोटिस
सवाई माधोपुर. अब उपकर जमा नहीं कराने पर कुर्की, ब्याज और पेनल्टी की कार्रवाई होगी। श्रम विभाग ने इस पर कार्रवाई करते हुए 451 निर्माण स्थलों को नोटिस है।
भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण उपकर अधिनियम को लागू करने में श्रम विभाग ने अब पूरी तरह से सख्ती की है। 27 जुलाई 2009 के बाद बने सरकारी, वाणिज्यिक और निजी भवनों पर एक प्रतिशत उपकर अनिवार्य है। नियोजक और ठेकेदारों को निर्माण कार्य प्रारम्भ करने की सूचना 30 दिन में देना और उपकर राशि नियत समय में जमा कराना जरूरी है। लेकिन बड़ी संख्या में निर्माणकर्ता इस नियम की अनदेखी कर रहे हैं। इसी कारण विभाग ने सैंकड़ों नोटिस जारी कर साफ कर दिया है कि उपकर जमा नहीं कराने पर कुर्की, ब्याज और पेनल्टी सहित कठोर वसूली की कार्रवाई होगी।
साढ़े चार सौ से अधिक मालिकों को नोटिस
वित्तीय वर्ष 2025-26 और 2026-27 में 451 से अधिक निर्माण स्थलों के मालिकों को नोटिस दिए हैं। यदि नियोजक उपकर जमा नहीं कराते हैं तो श्रम विभाग स्वयं निर्माण लागत का आकलन कर एक पक्षीय आदेश जारी करेगा और जिला कलक्टर को वसूली के लिए प्रकरण भेजेगा। निर्माण कार्य की अनुमानित लागत पर उपकर अग्रिम भी जमा कराया जा सकता है। यदि निर्माण अवधि एक वर्ष से अधिक है तो हर वर्ष की समाप्ति पर 30 दिन के भीतर उपकर राशि जमा करनी होगी। उपकर सेस की राशि निर्माण श्रमिकों के कल्याणकारी योजनाओं में खर्च की जाती है।
10 लाख रुपए से कम वाले भवनों पर छूट
10 लाख रुपए से कम लागत वाले आवासीय भवनों को छूट दी गई है, लेकिन इससे अधिक लागत वाले आवासीय भवन और सभी वाणिज्यिक निर्माण कार्य उपकर के दायरे में आते हैं। उपकर राशि जमा नहीं कराने पर नियोजक को 24 प्रतिशत वार्षिक ब्याज और 100 प्रतिशत पेनल्टी का सामना करना पड़ेगा। यदि किसी निर्माणकर्ता ने नगर परिषद या नगर निगम में नक्शा स्वीकृति के समय अनुमानित उपकर राशि जमा कराई है तो भी अंतिम उपकर निर्धारण राशि सहायक श्रम आयुक्त कार्यालय में जमा कराना अनिवार्य है।
कुर्की की लटकेगी तलवार
यदि उपकर राशि जमा नहीं कराई गई तो जिला कलक्टर को वसूली के लिए प्रकरण भेजा जाएगा। इसका मतलब है कि नियोजकों और ठेकेदारों की संपत्ति पर कुर्की की कार्रवाई भी हो सकती है। उपकर सेस की राशि निर्माण श्रमिकों के कल्याणकारी योजनाओं में खर्च की जाती है। यानी यह केवल कर नहीं, बल्कि श्रमिकों के जीवन स्तर सुधारने का साधन है। उपकर जमा न कराना सीधे तौर पर श्रमिकों के अधिकारों की अनदेखी है।
उपकर की अनिवार्यता
भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण उपकर अधिनियम, 1996 के तहत 27 जुलाई 2009 के बाद बने सभी भवनों पर एक प्रतिशत उपकर अनिवार्य है। चाहे सरकारी हो, वाणिज्यिक हो या निजी आवासीय किसी भी वर्ग को छूट नहीं दी गई है। केवल 10 लाख रुपए से कम लागत वाले आवासीय भवन ही इस दायरे से बाहर हैं।
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इनका कहना है
27 जुलाई 2009 के बाद निर्मित सरकारी/वाणिज्यिक/निजी आवासीय भवनों व निर्माण कार्यों को उपकर (सेस) के दायरे में रखा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 और 2026-27 में 451 से अधिक निर्माण स्थलों के मालिकों को नोटिस जारी किए हैं। नियत समय में उपकर जमा नहीं कराने पर नियोजक को 24 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। इसके साथ ही 100 प्रतिशत पेनल्टी का प्रावधान है। यानी जितनी उपकर राशि देय है, उतनी ही अतिरिक्त पेनल्टी भी देनी होगी।
राकेश कुमार मीना, सहायक श्रम आयुक्त, सवाईमाधोपुर