अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों की मौतों और बढ़ते मानव-बाघ संघर्ष को लेकर वन्यजीव विशेषज्ञों और अधिकारियों ने चिंता जताई है. रिजर्व में लगभग 200 बाघों की मौजूदगी के बीच विशेषज्ञों का मानना है कि गांवों के स्वेच्छा से विस्थापन के बाद मिलने वाली भूमि पर नए 'ग्रासलैंड' विकसित किए जाने चाहिए. इससे शाकाहारी जानवरों की संख्या बढ़ेगी और बाघों को पर्याप्त भोजन मिल सकेगा, जिससे वे आबादी वाले क्षेत्रों का रुख नहीं करेंगे. फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय और वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे के अनुसार, इस संघर्ष को रोकने के लिए प्रशासन, जिला परिषद और स्थानीय पंचायतों के बीच बेहतर समन्वय और समुदाय की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है.