जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले के अनुभवी कवि और साहित्यकार बिशन सिंह दर्दी ने महाकाव्य रामायण को स्थानीय लोगों के और करीब लाने की एक शानदार पहल की है. उन्होंने ढाई साल की कड़ी मेहनत के बाद रामायण का डोगरी में सफल अनुवाद किया है.
400 पन्नों की यह किताब पूरी तरह से डायलॉग (संवाद) फॉर्म में तैयार की गई है, जिससे थिएटर ग्रुप्स के लिए डोगरी भाषा में 'रामलीला' का मंचन करना बेहद आसान हो जाएगा. दर्दी का मानना है कि इस कदम से न केवल दर्शकों को अपनी मातृभाषा में भगवान राम की कथा सुनने को मिलेगी, बल्कि युवा पीढ़ी के बीच डोगरी भाषा को संरक्षित करने और बढ़ावा देने में भी बड़ी मदद मिलेगी.