सावन महीने के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली कामिका एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित एक अत्यंत फलदायी व्रत है। जानिए कामिका एकादशी की संपूर्ण पूजा विधि, प्रामाणिक व्रत कथा और पारण का सही समय!
सावन के पवित्र महीने में आने वाली कामिका एकादशी (Kamika Ekadashi) का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। 9 अगस्त 2026 (रविवार) को रखे जाने वाले इस पावन व्रत में भगवान विष्णु को पीले फल, फूल, पंचामृत और तुलसी पत्र अर्पित करने की परंपरा है।
पौराणिक कथा के अनुसार, कामिका एकादशी का व्रत ब्रह्महत्या जैसे गंभीर पापों का प्रायश्चित करने और आत्मा को मोक्ष मार्ग पर ले जाने में सहायक माना गया है। साधु के सुझाव पर क्षत्रिय द्वारा किए गए इस व्रत ने उसके जीवन के सभी कष्टों का निवारण किया था। एकादशी के दिन केवल अन्न का त्याग ही नहीं, बल्कि मन, कर्म और आचरण में संयम रखना भी आवश्यक है। इस दिन चावल खाने और तामसिक विचारों से पूरी तरह परहेज करना चाहिए।
एकादशी का व्रत अगले दिन द्वादशी तिथि में पारण (Parana Time) के साथ संपन्न होता है। इस वीडियो में देखिए कामिका एकादशी की पूरी कथा, पूजन सामग्री सूची, तुलसी सेवा का महत्व और पारण के नियम।
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