दिल्ली के सदियों पुराने और ऐतिहासिक 'हुमायूं के मकबरे' की सुंदरता पर वायु प्रदूषण का गहरा दाग लग रहा है. हाल ही में आईआईटी रुड़की और आईआईटी कानपुर द्वारा की गई एक संयुक्त स्टडी में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. रिसर्चर्स ने पाया है कि मकबरे के बलुआ पत्थर पर जम रही काली परत मुख्य रूप से 'जिप्सम' है, जो प्रदूषित हवा में मौजूद सल्फर डाइऑक्साइड (SO2), धूल और नमी के रिएक्शन से बन रही है.
इस खुलासे के बाद पर्यावरणविदों ने गहरी चिंता जताते हुए सवाल उठाया है कि जब खतरनाक प्रदूषण से सदियों पुरानी मजबूत इमारतें सुरक्षित नहीं हैं, तो इंसानों और बच्चों के फेफड़ों का क्या हाल हो रहा होगा?