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swm news: जनता ने थामा विकास का तराजू: प्रत्याशियों से सड़क, सफाई और सीवरेज का हिसाब मांगने की तैयारी

2026-08-21 3,840 Dailymotion


सफाई, सड़क, सीवरेज, जलभराव और रोडलाइट समेत शहर की समस्याएं बनेगी चुनावी मुद्देआरक्षण ने उलट दी सियासत, दिग्गजों की पकड़ ढीली और नए चेहरों की होगी एंट्री
सवाईमाधोपुर. निकाय चुनाव का ऐलान होते ही जिले की सियासत में हलचल तेज हो गई है। आरक्षण से बदले समीकरणों ने पुराने दिग्गजों को नए वार्डों में धकेल दिया है और नए चेहरों को मौका दिया है। शहर की जनता अब केवल वादों से संतुष्ट नहीं होगी, बल्कि पांच साल के कामकाज का पूरा हिसाब मांगेगी। टूटी सड़कों, बदहाल सफाई, सीवरेज और जलभराव, बुझी रोडलाइटें, अतिक्रमण और पार्किंग की समस्या। ये सब अब सीधे जनता के सवाल बन गए हैं।

आरक्षण ने बदली बिसात
आरक्षण बदलने से कई निवर्तमान पार्षद अपने ही वार्ड से चुनाव लड़ने का मौका खो बैठे हैं। महिला, एससी, एसटी और ओबीसी के लिए आरक्षित वार्डों में नए दावेदार सक्रिय हो गए हैं। नगरपरिषद सवाईमाधोपुर में सभापति पद ओबीसी होने से जोड़‑तोड़ और समीकरणों की राजनीति तेज हो गई है। अब पार्टियों के सामने चुनौती है कि पुराने चेहरों को साधते हुए वार्डों में मजबूत प्रत्याशी उतारें। इस बार समीकरण इतने उलझ गए हैं कि कई दिग्गज नेताओं को अपनी पकड़ वाले वार्ड छोड़ने पड़े हैं। नए चेहरों की सक्रियता ने सियासत में ताजगी तो दी है, लेकिन पुराने नेताओं के लिए यह बड़ा झटका है। सभापति पद ओबीसी होने से जातीय राजनीति का रंग और गहरा हो गया है।
सालाना 15 करोड़ खर्च, फिर भी शहर की हालत खस्ताहाल
नगरपरिषद सवाईमाधोपुर का सालाना खर्च 15 करोड़ से अधिक है। इसके बावजूद शहर की हालत खस्ताहाल है। धरातल पर सबसे बड़ी समस्या बदहाल सफाई व्यवस्था ही बनी हुई है। जगह‑जगह कचरे के ढेर, अवरुद्ध सीवरेज और जलभराव ने शहर को बेहाल कर दिया है। जनता अब केवल वादों से संतुष्ट नहीं होगी। इस बार बजट, खर्च और धरातल पर हुए कामों का मिलान कर प्रत्याशियों से जवाब माँगने की तैयारी है। सफाई व्यवस्था की बदहाली, सीवरेज का संकट और जगह‑जगह फैली गंदगी ने शहर की जनता को नाराज़ कर दिया है। जनता पूछेगी कि करोड़ों का बजट कहां गया और क्यों शहर की हालत जस की तस बनी रही।

चुनावी रण में रहेगी सवालों की बौछार

इस बार प्रत्याशियों को केवल वोट नहीं, बल्कि विकास का पूरा हिसाब देना होगा। जनता पूछेगी कि पांच साल में शहर को क्या मिला और क्या छीन लिया। निकाय चुनाव अब सीधे जनता की अदालत बन गया है। हर प्रत्याशी को कामकाज का तराजू लेकर खड़ा होना होगा। जनता सड़क, सफाई, सीवरेज, जलभराव, रोडलाइट, अतिक्रमण और पार्किंग जैसी समस्याओं का हिसाब मांगेगी। यह चुनाव केवल सत्ता पाने का नहीं, बल्कि जनता के सवालों का सामना करने का है।
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शहर के प्रमुख मुद्दे...
बदहाल सीवरेज व्यवस्था : कई इलाकों में सीवरेज ठप, आमजन परेशान।

नालों की सफाई का अभाव : समय पर सफाई न होने से बारिश में जलभराव।
बढ़ता अतिक्रमण : सड़कों और सार्वजनिक जगहों पर कब्ज़ा, यातायात प्रभावित।

अपर्याप्त सफाई व्यवस्था : नियमित सफाई न होने से कचरे के ढेर।
सड़कों की खराब हालत : जगह‑जगह गड्ढे और टूटी सड़कें।

पार्किंग व्यवस्था का अभाव : मुख्य बाजार में जाम की समस्या।
रोडलाइट की बदहाली : गली‑मोहल्लों और बाजार में अंधेरा।

बेसहारा मवेशी और बंदरों का आतंक : सड़कों और मंडियों में रोजाना परेशानी, गली-मोहल्लों में बंदरों के आतंक से लोगों में बना है डर।
सभापति पद की भागदौड़ हाेने लगी तेज
नगर निकाय चुनाव की लॉटरी खुलने के साथ ही सवाईमाधोपुर नगरपरिषद के सभापति पद को लेकर कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों में हलचल तेज हो गई है। वार्डों की लॉटरी सामने आने के बाद अब दोनों दलों के नेता ओबीसी वार्ड से चुनाव लड़ने की जुगत में हैं। दावेदारी में कई नाम सामने आए हैं और संगठनात्मक स्तर पर जोड़‑तोड़ शुरू हो गई है। टिकट वितरण की असली तस्वीर सामने आने में अभी वक्त है, लेकिन दावेदारों की सक्रियता ने चुनावी रण को और गरमा दिया है।