E25 Petrol Rollout: देश भर में E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कम हो रहे माइलेज और इंजनों को हो रहे नुकसान के भारी विरोध के बाद मोदी सरकार अब E25 ईंधन लाने की रफ्तार धीमी कर सकती है। क्या वाकई एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल आपकी जेब और गाड़ी दोनों पर भारी पड़ रहा है? जानिए इस वीडियो में।
भारत में पेट्रोल से चलने वाले करोड़ों वाहन मालिकों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। सरकार ने पहले वर्ष 2030 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने (E20 Fuel) का लक्ष्य रखा था, जिसे तय समय से काफी पहले ही देश के अधिकांश हिस्सों में लागू कर दिया गया। लेकिन अब, इसके अगले चरण यानी 25 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (E25 Petrol) को लागू करने की योजना पर ब्रेक लगता हुआ दिखाई दे रहा है। देशभर से वाहन मालिकों द्वारा लगातार माइलेज कम होने, पिकअप घटने और इंजनों के कल-पुर्जे खराब होने की आ रही शिकायतों के बाद सरकार अब इस पर दोबारा विचार करने के मूड में है।
हाल ही में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में ऑटोमोबाइल कंपनियों और पुर्जे निर्माताओं ने इस तकनीकी समस्या को लेकर गहरी चिंता जताई है। दरअसल, एथेनॉल की रासायनिक प्रकृति सामान्य पेट्रोल से बिल्कुल अलग होती है। इसकी ऊर्जा घनत्व (Energy Density) कम होने की वजह से एक लीटर एथेनॉल, एक लीटर पेट्रोल जितनी ऊर्जा पैदा नहीं करता, जिससे सीधा असर माइलेज पर पड़ता है। इसके अलावा, एथेनॉल हवा से नमी यानी पानी सोखता है, जिससे पुराने इंजनों की रबर सील और फ्यूल पाइप में जंग लगने या उनके खराब होने का खतरा काफी बढ़ जाता है।
हालांकि, सरकार इस एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को भारत की ऊर्जा सुरक्षा, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के एक बड़े मास्टरस्ट्रोक के रूप में देखती है। लेकिन भारत की सड़कों पर चल रहे करोड़ों पुराने वाहनों के भविष्य और आम उपभोक्ताओं के अतिरिक्त जेब खर्च को ध्यान में रखते हुए, अब इस नीति को जल्दबाजी में थोपने के बजाय सभी हितधारकों से व्यापक चर्चा के बाद ही आगे बढ़ाया जाएगा। इस पूरे विवाद और अपनी गाड़ी पर पड़ने वाले असर को विस्तार से समझने के लिए वीडियो को अंत तक जरूर देखें।
About the Story:
Facing widespread backlash from vehicle owners over mileage drops and engine compatibility issues caused by E20 fuel, the Indian government is likely to slow down its proposed transition to E25 petrol. While ethanol blending reduces crude oil import bills and carbon emissions, technical concerns such as moisture absorption and lower energy density are causing significant maintenance issues for legacy vehicles, prompting a policy re-evaluation with top automobile manufacturers.
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