20 जुलाई को CJP के संसद मार्च के दौरान बल प्रयोग पर पुलिस ने सुप्रीमकोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है. पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर जरूरत से ज़्यादा बल प्रयोग के आरोपों को खारिज कर दिया है. पुलिस का कहना है कि कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ थी. वहां असामाजिक तत्व और हिस्ट्री-शीटर भी मौजूद थे, जो रैलियों में घुस आए थे. ऐसे तनावपूर्ण और खराब स्थिति के हिसाब से उनकी कार्रवाई सही और उचित थी. हलफनामे में आगे कहा गया है कि पुलिस, RAF और CRPF के अधिकारियों ने लाउडस्पीकर पर बार-बार अनुरोध और चेतावनी दी, इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड की कई परतों को तोड़ दिया और हिंसा पर उतर आए. पुलिस के मुताबिक, भीड़ में मौजूद लोगों ने संसद में घुसने की कोशिश की.