Breaking News: NEET Protest मामले में Supreme Court सख्त, नाबालिगों को तुरंत रिहा करने का निर्देश! नीट पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में हुए छात्र प्रदर्शनों और पुलिस कार्रवाई पर सर्वोच्च अदालत ने बड़ा कदम उठाया है।
नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में छात्रों द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन और उस पर हुई कथित पुलिस बर्बरता/लाठीचार्ज की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में एक बेहद अहम सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने पूरे मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि पहली नजर में यह मामला एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच का बनता है। अदालत ने संकेत दिया है कि कथित पुलिस ज्यादती की जांच के लिए जल्द ही एक उच्च स्तरीय स्वतंत्र समिति का गठन किया जा सकता है।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए देश के सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए या गिरफ्तार किए गए ऐसे सभी नाबालिग छात्रों (18 वर्ष से कम आयु) और बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा किया जाए। शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि छात्रों के खिलाफ फिलहाल कोई भी दंडात्मक/कठोर कार्रवाई (coercive action) न की जाए।
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संविधान में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार हर नागरिक को प्राप्त है, लेकिन कानून सबके लिए बराबर है। अदालत ने कहा कि अगर पुलिस ने प्रोटोकॉल तोड़कर अत्यधिक बल प्रयोग किया है तो उसकी निष्पक्ष जांच होगी, और अगर किसी प्रदर्शनकारी या उपद्रवी ने हिंसा कर कानून हाथ में लिया है तो उसके खिलाफ भी कानून के मुताबिक निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने डिजिटल व सीसीटीवी साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के आदेश भी जारी किए हैं।
About the Story:
The Supreme Court of India, led by Chief Justice of India (CJI) Surya Kant, has taken a strict stance regarding police action against students protesting over the NEET-UG paper leak issue. The top court directed all states to immediately release detained minor students and first-time protesters without criminal backgrounds, while halting coercive action against demonstrators. Indicating the formation of an independent committee to investigate allegations of police brutality and violence, the CJI emphasized that constitutional rights and law enforcement discipline must balance equally.
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